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चिंतन मनन: भाग 1': 'Bhaag 1' / 'भाग 1' - Brossura

अक्षयचंद्र शर्मा

 
9798892778121: चिंतन मनन: भाग 1': 'Bhaag 1' / 'भाग 1'

Sinossi

चिंतन मनन के माध्यम से प्रयास कुछ ऐसा कहने का है जो उजला हो, मधुर हो, सहज सरल हो, प्रेरक हो, उद्‌बोधक और हृदय ग्राह्म हो। मधु मधुर हो और पीयूष सा हितकारी भी हो। बातें वे ही पुरानी - इतिहास की, सन्तों की, कवि-कोविन्दों और लोकमानस की - उसे जरा बदल कर, नया बना कर, सुपाच्य बना कर नयी कथन भंगिमा से प्रस्तुत करने का यह एक विनम्र प्रयास है। असल में इस तुमुल कोलाहल कलह में 'चिंतन-मनन' सहृदयों को यों भाता है - जैसे 'कामायनी' कार के शब्दों में 'तपन में शीतल मंद बयार' हो! आशा है, यह 'चिंतन-मनन' जीवन में आशा की नई किरण लिये प्रोद्भासित होगी।

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