रुके रुके से क़दम... - Brossura

नवीन “बेदिल”

 
9798894980478: रुके रुके से क़दम...

Sinossi

ज़िन्दगी के कुछ लम्हे ऐसे लिख जाते हैं दिल पे जैसे आजकल का टैटू आर्ट… और जब कोई नया वाकया उन लम्हो के एहसास को कुरेद जाये, तो दिल से एक आह निकल कर रूमानियत या बेबसी की ओर खींच ले जाती है I ऐसे में उस लम्हे को दोबारा जीने की कोशिश में कुछ यादें, कुछ एहसास और कुछ ख्वाहिशें बह निकलती हैं दिल से, और ले लेती हैं शक्ल एक ऐसी दास्ताँ की जो दिल में बहते बहते नज़्मों के बंदरगाह पे आ के ठहरती है I ऐसे ही कुछ एहसासों और लम्हों के तानेबाने की दास्ताँ है… रुके रुके से क़दम…

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