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मैं मुन्ना हूँ: (राही): (Rahi) / (राही) - Brossura

मोईनुद्दीन ख़ान

 
9798896734796: मैं मुन्ना हूँ: (राही): (Rahi) / (राही)

Sinossi

मुन्ना! अपनी उम्र से ज़्यादा ऊँची सोच के साथ रब के नियमों को मानने वाला जोशीला नौजवान अपनी लेखनी थाम चुका है। ज़िन्दगी में मस्त है लेकिन दुनियावी ख़ुराफ़ातों से बेहद आहत। उसकी सोच है कि ज़िन्दगी बहुत छोटी है और ये हमारी सोच से भी कहीं तेज़ बीत रही है। पीछे मुड़कर देखने पर हम पायेंगे कि बहुत से पल हम ने यूँ ही दुःख में गँवा दिये। ख़ुश रहना और ख़ुशी पाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। हम आज़ाद हैं ये चुनाव करने के लिए कि किस से जुड़ें और किस से नहीं। समाज से हम कुछ बेहतर प्राप्त करने के हक़दार हैं। कीना, कपट, दुःख और लोगों की ईर्ष्या हमारे साथी नहीं। हम इसके पात्र नहीं। आख़िर हम चेतना रखते हैं। लोगों के षड्यन्त्र और ख़राब चालों से दूर रहकर हमें इन तेज़ी से बीत रहे लम्हों को ख़ुशी से जीना है। क्या इस ज़ालिम दुनिया को कभी ये एहसास होगा कि उसने एक हमेशा हँसते, खेलते, बोलते, चहकते, ऊर्जावान, खिखिलाते और मदद करते रहने वाले पंछी को ख़ामोश कर दिया है? वही ज़िम्मेदार है इस अन्धेरे का? बिल्कुल नहीं। इस लिए जीवन सुकून भरा जीना है। क्योंकि ये हमारा हक़ भी है। उसकी गुज़ारिश है हम से कि हम ख़ुद प्रेम भरा जीवन जियें और इस जतन में तुरन्त लग जायें कि कहीं कोई मुन्ना फिर हिम्मत न हार बैठे। आख़िर मुन्ना की क़लम बहुत कुछ ऐसा कह गयी है जिसे सजग होकर अपनाने की ज़रूरत हम सबको है।

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