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अश्वत्थामा सिंड्रोम: Shapit Amarata - Brossura

डॉ. रवीन्द्र पस्तोर

 
9798901363591: अश्वत्थामा सिंड्रोम: Shapit Amarata

Sinossi

“अश्वत्थामा सिंड्रोम” सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं यह आधुनिक मनुष्य की मनोवैज्ञानिक यात्रा है।महाभारत का वह चिरंजीवी योद्धा, जिसके माथे पर जलता घाव एक श्राप बनकर रह गया, आज भी हमारे भीतर जीवित है हमारी स्मृतियों, रोष, पछतावे और आंतरिक संघर्षों में। यह पुस्तक एक दर्पण है जो दिखाती है कि कैसे अतीत की पीड़ा, प्रतिशोध, अपराधबोध और तुलना का विष हमें भीतर से खाता रहता है।हम जीवित हैं, पर मुक्त नहीं… सांस लेते हैं, पर शांति खो चुके हैं… आगे बढ़ना चाहते हैं, पर स्मृतियों की बेड़ियों में जकड़े हैं। क्या हम सभी कहीं न कहीं अश्वत्थामा की तरह अपने अदृश्य घावों के साथ नहीं जी रहे?यह पुस्तक आपको आपके “आंतरिक कुरुक्षेत्र” में उतारती है जहाँ असली युद्ध बाहरी नहीं, मन के भीतर है।

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