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भू-राजनीति का व्याकरण - Brossura

अमर कुमार

 
9798904519094: भू-राजनीति का व्याकरण

Sinossi

भू-राजनीति केवल सीमाओं, युद्धों और शक्ति संघर्षों का अध्ययन नहीं है; यह उस गहन और निरंतर विकसित होती प्रक्रिया को समझने का माध्यम है जिसके द्वारा भूगोल, संसाधन, सभ्यता, तकनीक, अर्थव्यवस्था और सामरिक हित मिलकर विश्व व्यवस्था की दिशा निर्धारित करते हैं। मानव इतिहास में साम्राज्यों का उदय और पतन, समुद्री मार्गों पर नियंत्रण, ऊर्जा संसाधनों की प्रतिस्पर्धा, व्यापारिक गलियारों का विस्तार और आधुनिक तकनीकी प्रभुत्व सभी भू-राजनीतिक प्रक्रियाओं के ही परिणाम रहे हैं। इक्कीसवीं सदी में जब विश्व बहुध्रुवीय शक्ति संरचना की ओर बढ़ रहा है, तब भू-राजनीति केवल सैन्य शक्ति का प्रश्न नहीं रह गया, बल्कि यह आर्थिक प्रभाव, तकनीकी नवाचार, सूचना नियंत्रण, साइबर स्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा और जलवायु परिवर्तन जैसे नए आयामों से भी गहराई से जुड़ चुका है।आज विश्व राजनीति ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रही है जहाँ महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि समुद्रों, डेटा नेटवर्कों, ऊर्जा गलियारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैचारिक प्रभाव क्षेत्रों में भी दिखाई देती है। भू-राजनीति आज विश्व व्यवस्था का केंद्रीय आधार बन चुकी है। ऐसे परिवर्तित वैश्विक संदर्भ में यह पुस्तक भू-राजनीतिक सिद्धांतों के आधारभूत स्वरूप को समकालीन विश्व राजनीति के साथ जोड़ते हुए प्रस्तुत करती है, ताकि पाठक केवल सिद्धांतों को न समझें, बल्कि उनके व्यावहारिक प्रभावों को भी पहचान सकें। इस पुस्तक में शास्त्रीय भू-राजनीतिक चिंतकों हैलफोर्ड मैकिंडर, अल्फ्रेड महान, निकोलस स्पाइकमैन और कार्ल हॉसहोफर के सिद्धांतों का गहन विश्लेषण किया गया है। इन विचारकों ने यह स्थापित किया कि भूगोल केवल मानचित्र पर अंकित सीमाएँ नहीं, बल्कि शक्ति, सुरक्षा और वैश्विक प्रभुत्व का आधार है। मैकिंडर का “हार्टलैंड सिद्धांत”, महान की “समुद्री शक्ति की अवधारणा”, स्पाइकमैन का “रिमलैंड सिद्धांत” और हॉसहोफर की भू-रणनीतिक दृष्टि आज भी वैश्विक राजनीति को समझने के लिए प्रासंगिक माने जाते हैं। 

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